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दिमाग पर पड़ रहा वर्क फ्रॉम होम का बुरा असर? काम आएंगे ये 4 टिप्स

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कोरोना काल में इंसान के काम-काज के तौर तरीके भी बदल चुके हैं. कोरोना के बीच कई कंपनियां ‘वर्क फ्रॉम होम’ का कल्चर अपनाने लगी हैं. यह वर्क कल्चर कितना काम करेगा और इसमें किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, इसे समझना भी जरूरी है.

मनोचिकित्सक डॉ. संदीप वोहरा ने बताया कि कोरोना काल में ये साबित हो चुका है कि आने वाले समय में भी वर्क फ्रॉम होम का महत्व रहेगा. हालांकि ऐसा लगातार करने से दिमाग पर ज्यादा जोर भी पड़ेगा, जिससे बचना भी जरूरी है. डॉ. वोहरा ने इससे बचने के टिप्स भी साझा किए.

उन्होंने कहा, ‘वर्क फ्रॉम होम से लोग चिढ़चिढ़ापन, उदासी या अनिद्रा जैसी समस्याओं के भी शिकार हो सकते हैं. इसके लिए अपने लाइफस्टाइल को बैलेंस करना बहुत जरूरी है. लगातार घंटों बैठकर काम करने की बजाए 45 मिनट से 1 घंटे काम करने के बाद 10 मिनट का ब्रेक लें. काम के बीच में ऑनलाइन इंटरेक्शन में ब्रेक रखना भी जरूरी है’

डॉ. वोहरा ने आगे कहा, ‘परिवार के लोगों के साथ समय बिताएं और अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जुड़ें. दिमाग की ताजगी के लिए ऐसा करना बहुत जरूरी है. इंसान एक सामाजिक प्राणी है इसलिए समाज से जुड़े रहना उसके लिए बेहद जरूरी है.’

इसके अलावा डॉ. वोहरा ने बताया कि लॉकडाउन के समय घर में रहने वाले लोगों को पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है. रात के वक्त 6-9 घंटे की भरपूर नींद लें. व्यायाम के जरिए खुद को फिजिकली एक्टिव रखें. इन सभी बातों को ध्यान में रखने से आपके दिमाग पर वर्क फ्रॉम होम का भार नहीं पड़ेगा.

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